जो लोग अपनें जीवन से संतुष्ट नहीं रहते, वे कभी भी शांत नहीं रह सकते

मन का मूल स्वाभाव ही हैं चंचलता। मन हमेशा कोई कोई विचारों में उलझा ही रहता हैं। मन हमेशा एक भटकाव की स्थिति में रहता हैं। मन को अपने पसंद का दिख गया मनपसंद मिल गया ये बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ने लगता हैं। कभी उकता जाए तो ये विपरीत दिशा में दौड़ने लगता हैं।पढ़ना जारी रखें “जो लोग अपनें जीवन से संतुष्ट नहीं रहते, वे कभी भी शांत नहीं रह सकते”