क्या प्रारब्ध की धारणा से व्यक्ती अकर्मण्य बनता है प्रारब्ध कर्म क्या हैै?कर्म मुक्ति या खुद ही बंधे हैं, खुद ही मुक्त होंगे

प्रारब्ध पूर्व जन्म में किए गए कर्मों को प्रारब्ध कहते हैं। जिसे लोग भाग्य के नाम से भी जानते हैं। मनुष्य नित्य कुछ ना कुछ कार्य करते ही रहते हैं जिसे कर्म कहते है। अच्छा कार्य करने से अच्छे कर्म और बुरा कार्य करने से बुरे कर्म बनते हैं। प्रारब्ध का अर्थ ईश्वर ने मनुष्यपढ़ना जारी रखें “क्या प्रारब्ध की धारणा से व्यक्ती अकर्मण्य बनता है प्रारब्ध कर्म क्या हैै?कर्म मुक्ति या खुद ही बंधे हैं, खुद ही मुक्त होंगे”